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Monday, July 10, 2023

मनबढ़ों के चलते जानमाल का खतरा, डीएम से सीएम तक लगाई गुहार

बस्ती। शहर कोतवाली क्षेत्र के विशनुपुरवा मोहल्ला निवासी मनबढ़ों के चलते एक परिवार को जानमाल का खतरा है। पीडित खुद को बचाने की खातिर अफसरों की चक्कर लगा रहा है। मोहल्ला निवासी जितेन्द्र व सुरेश पुत्रगण संचित ने जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक भेजे शिकायती पत्र में कहा है कि उनका जमीन और मकान को लेकर पट्टीदारों से मुकदमा चल रहा है।

सिविल जज जूनियर डिवीजन बस्ती के यहां चल रहे मुकदमा जितेन्द्र बनाम संपत में पट्टीदारों का पक्ष बेहद कमजोर है। इसलिये वे दबाव बनाने की नीयत से बेटियों का आगे लाकर दुष्कर्म व छेड़छाड़ की घटनाओं में मनगढ़न्त तरीके से फसाने की साजिश रच रहे हैं। शिकायतकर्ता जितेन्द्र का कहना है कि उनके बाबा तीन भाई थे, धनई, रामजतन और रामलखन। रामजतन पुत्र बेकारू के पास कोई औलाद नही थी, उन्होने अपना हिस्सा जितेन्द्र आदि को वसीयत कर दिया है, जिसके आधार पर वे कब्जा दाखिल हैं। जबकि उनके पिता संचित बाबा धनई की इकलौती औलाद थी।
धनई के मरने के 10 साल बाद उनकी सम्पत्ति पर केवल संचित का हक था लेकिन साजिश रचकर पट्टीदारों ने नगरपालिका में उनकी सम्पत्ति पर संचित के अलावा संम्पत, और रामजतन का भी नाम चढ़वा दिया। जबकि सभी के मकान अलग अलग थे और उप पर सभी का कब्जा था। शिकायतकर्ता जितेन्द्र वसीयत से प्राप्त हिस्से में शौचालय बनवाने लगे, इसको लेकर दोनो पक्ष आमने सामने आ गये। दूसरे पक्ष के संपत, विनय, आशा, निशा, ऊषा, कोमल, सुमित ने एकजुट होकर जितेन्द्र, सुरेश, मनीषा और मां कैलाशपति को मारापीटा। मामले में दोनो पक्षों के जितेन्द्र, मनीषा, सुरेश और पूनम तथा दीपक का शांतिभंग की धारा में चालान भी हुआ था।
शिकायतकर्ता का कहना है कि वह टैम्पू चलाकर अपना परिवार चलाता है। आये दिन दूसरे पक्ष के लोग टैम्पू का परदा फाड़ देते हैं, टायर पंचर कर देते हैं और तरह रह से परेशान करते हैं। मना करने या पूछने पर सीधे फौजदारी पर आमादा हो जाते हैं। अब दूसरा पक्ष दबाव बनाने, आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान करने के लिये छेड़छाड़ व दुष्कर्म का फर्जी केस रचकर उन्हे फसाने की साजिश रच रहा है। जितेन्द्र ने मांग किया है कि वे और उनके परिजन निर्दाेष हैं, मामले की जांच चाहे जिस स्तर से करा ली जाये। यह भी मांग किया झूठे मामले में फसाने की साजिश रचने वालों को को हतोत्साहित किया जाये जिससे निडर होकर वे अपने परिवार का भरण पोषण कर सके।

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