गोरखपुर। महाप्रबन्धक, पूर्वोत्तर रेलवे चन्द्र वीर रमण के मुख्य अतिथि में 06 दिसम्बर को प्रेक्षागृह में भारत रत्न बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाप्रबन्धक चन्द्र वीर रमण, वरिष्ठ उप महाप्रबन्धक डी.के.सिंह, प्रमुख मुख्य विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ रेल अधिकारी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति एसोसिएषन के अध्यक्ष बच्चू लाल, महामंत्री चन्द्र शेखर तथा अन्य रेलकर्मियों ने बाबा साहब के चित्र पर मार्ल्यापण कर एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर पूर्वोत्तर रेलवे कला समिति के कलाकारों द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर महाप्रबन्धक रमण ने बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को इंदौर के पास महू छावनी के एक अत्यन्त साधारण परिवार में हुआ था। बाबा साहब ने 06 दिसम्बर, 1956 में शरीर का परित्याग किया। इसी स्मृति में हम इस दिन को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाते है। डा. अम्बेडकर महान विधिवेत्ता के साथ-साथ सामाजिक न्याय के अगुवा भी थे। समाज के वंचित वर्गो के उत्थान के लिये वे जीवनपर्यन्त संघर्षरत रहे। शोषितों, दलितों एवं महिलाओं के उत्थान के लिये बाबा साहब ने अपने जीवन काल में जो कुछ किया वे आज भी प्रसांगिक है। डा. अम्बेडकर ने सर्वाधिक जोर षिक्षा पर दिया क्योंकि एक षिक्षित व्यक्ति ही संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों और योजनाओं का लाभ उठाने में समर्थ होता है। शिक्षा से उनका तात्पर्य मात्र डिग्रियां प्राप्त करना नहीं था बल्कि एक समझदार, जागरूक और विचारषील नागरिक बनने से था जो राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे सके। श्री रमण ने कहा कि दलितों को षिक्षित करने के उद्देष्य से वर्ष 1946 में उन्होंने सिद्धार्थ कालेज की स्थापना की। महाप्रबन्धक ने कहा कि संविधान की रचना उनके कार्यों का एक पहलू मात्र है। षिक्षा प्राप्त करने की उनकी तपस्या, लगन एवं षिक्षा द्वारा प्राप्त जागृति तथा मानसिक दृढ़ता हमारे लिये प्रेरणाप्रद है। डा. अम्बेडकर भारत के ऐसे महान सपूत थे जिन्होंने जीवन की अत्यन्त विषम परिस्थितियों का दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए देष के सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक उत्थान के साथ-साथ समतामूलक समाज के निर्माण के लिये अपना सर्वस्व समर्पित किया। संविधान के प्रारूप समिति के अध्यक्ष एवं भारत के प्रथम कानून मंत्री के रूप में किये गये इनके योगदान को विस्मृत नहीं किया जा सकता। प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी बिपिन कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुरूप अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
इसके पूर्व, अपने स्वागत सम्बोधन में अध्यक्ष, रेलवे भर्ती सेल अतुल त्रिपाठी ने कहा कि बाबा साहब बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। इसलिये उनको संविधान बनाने का कार्य दिया गया। वे सामाजिक उत्थान के लिये प्रयासरत रहे। शोषित, दलित महिला एवं वंचितों के लिये बाबा साहब के कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता। हमें बाबा साहब के विचारों को याद कर उनके पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करना चाहिये। इस अवसर पर हम सभी उन्हें नमन करते है।
एस.सी. व एस.टी. एसोसिएषन के अध्यक्ष बच्चू लाल ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहब ने कड़ी मेनहत करके संविधान बनाया। बाबा साहब ने हर व्यक्ति को देष में अधिकार दिलाया। उन्होंने महिला कोड बिल दिया। बाबा साहब समाज उद्वारक थे। ऐसे महान व्यक्ति को कभी भुलाया नहीं जा सकता। महामंत्री एस.सी. व एस.टी. एसोसिएषन चन्द्रषेखर ने कहा कि बाबा साहब ऐसे महापुरूष हैं जिन्हें बड़ी षिद्दत से याद किया जाता है। उनकी कृतियों, त्याग एवं बलिदान के वजह से करोड़ो लोग देष की मुख्य धारा में खड़े हुए है। आज बाबा साहब के संविधान के कारण ही देष तरक्की के इस मुकाम पर है। उन्होंने पानी के लिये सत्याग्रह किया। बाबा साहब ने संविधान में अस्पृष्यता को अपराध की श्रेणी में दंडनीय बनाया।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए उप मुख्य कार्मिक अधिकारी व आई.आर. आर.पी. चन्द ने कहा कि डा. अम्बेडकर ने दलित समाज में सुधार लाने में अहम भूमिका अदा की। उन्हें समाज सुधारक, संविधान निर्माता, दलितों के मसीहा जैसे संबोधन देकर उनके कार्यों के लिये जाना जाता है। कार्यक्रम का संचालन आसिफ जहीर ने किया।
No comments:
Post a Comment