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Wednesday, March 23, 2022

बांझपन का खतरा बढ़ा सकती है टीबी

 -    टीबी पीडि़त महिलाओं में पेल्विक टीबी के मामले अधिक

-    दुनिया में बीमारी से होने वाली मौतों के 10 प्रमुखकारणों में एक है टीबी

संतकबीरनगर। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एस डी ओझा ने बताया कि क्षय रोग यानिटीबी को दुनिया भर में बीमारी से होने वाली मौतों के 10 प्रमुख कारणों मेंसे एक माना जाता है। यह  बीमारी लोगों के शरीर के दूसरे भागों मेंफैलकर उन्हें संक्रमित कर सकती है, जिससे महिलाओं और पुरुषों दोनों मेंबांझपन का खतरा हो सकता है। बाल और नाखून को छोड़कर टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। इसलिए टीबी के लक्षणों को पहचानकर उनका समय से उपचार जरुरी है।


डॉ ओझा ने बताया कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस के कारण टीबी होती है । यह बीमारी प्रमुख रूप से फेफड़ोंको प्रभावित करती है लेकिन इसका समय रहते उपचार न कराया जाए तो यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैलकर उन्हें संक्रमित करती है । यह संक्रमण किडनी, पेल्विक, डिम्बवाही नलियों गर्भाशय और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। टीबी एकगंभीर स्वास्थ्य समस्या है क्योंकि जब बैक्टीरिया प्रजनन मार्ग में पहुंचजाते हैं, तब जेनाइटल टीबी या पेल्विक टीबी हो जाती है। यह महिलाओं औरपुरुषों दोनों में बांझपन का कारण बन सकता है। पीड़ितमहिलाओं में से 10 में से दो महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पाती हैं। महिलाओं में जननांगों की पेल्विक टीबी के 40 से80 फीसदीमामले देखे गए हैं । यह टीबी उन लोगों को होती है जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या फिर वह पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में रहते हैं। पीडि़त  व्यक्ति जब खांसता या छींकता है तब बैक्टरिया हवामें फैल जाते हैं और जब हम सांस लेते हैं यह हमारे फेफड़ों में चले जातेहैं। इसके अतिरिक्‍त पीडि़त व्‍यक्ति के साथ यौन संबंध बनाना भी जननांगों कीपेल्विक टीबी होने का एक कारण है।

क्षय रोगियों को गोद लेंगी संस्‍थाएं

राज्‍यपाल आनन्‍दीबेन पटेल के द्वारा क्षय रोगियों को गोद लेने की पहल को ध्‍यान में रखते हुए विश्‍व क्षय रोग दिवस (24मार्च)पर स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं के साथ कलेक्‍ट्रेट सभागार में संगोष्‍ठी का आयोजन गुरुवार को सुबह 11 बजे से किया जाएगा। यह आयोजन जिलाधिकारी दिव्‍या मित्‍तल की अध्‍यक्षता में होगा।

137 क्षय रोगी लिए जा चुके गोद

जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि जनपद में अभी तक केवल बाल क्षय रोगियों को गोद लिया गया है। जनपद में वर्तमान में 137 क्षय रोगी गोद लिए जा चुके हैं। इससे पूर्व 110 बाल क्षय रोगियों को गोद लिया गया था। उनका उपचार अब समाप्‍त हो चुका है और वे सामान्‍य जीवन व्‍यतीत कर रहे हैं।

निरन्‍तर की जाती है क्षय रोगियों की खोज

क्षय रोग के जिला कार्यक्रम समन्‍वयक अमित आनन्‍द ने बताया कि क्षय रोगियों की खोज के लिए वर्ष2017 से लेकर अब तकआठ अभियान चलाए गए। इन अभियानों में जिले की 20 लाख आबादी को कवर किया गया। 4054 सेम्‍पल लिए गए तथा अभियान में कुल 332 क्षय रोगी खोजे गए।

प्राइवेट चिकित्‍सकों की ले रहे मदद

जनपद में क्षय रोगियों के चिन्‍हीकरण में प्राइवेट चिकित्‍सकों की भी मदद ली जा रही है। इसके तहत वर्ष 2018 में 353, वर्ष 2019 में 513, वर्ष 2020 में 325, वर्ष 2021 में 375 त‍था वर्ष 2022 में अभी तक 64 क्षय रोगी खोजे गए है। क्षय रोगियों के खोज व उनके इलाज पूर्ण होने पर प्राइवेट चिकित्‍सकों को 1000 रुपए प्रोत्‍साहन भत्‍ते के रुप में दिए जाते हैं।

क्षय रोग के लक्षण

दोहफ्तेया उससे ज्यादा समयसे खांसी, बलगम में खून आना, खांसते या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना, अचानक वजन घटना, , सोते हुए पसीना आना, थकान, बुखार आदि हैं। इसके अतिरिक्‍त पेल्विक टीबी के लक्षणों में माहवारी का अनियमित होना, सहवास के बाद दर्द होना शामिल है।

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