वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
बस्ती। हर्रैया कोतवाली क्षेत्र में दुष्कर्म की कथित पीड़िता नाबालिग बालिका का मुकदमा छह दिन बाद दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता की मां ने न्याय पीठ बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष शिकायत पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने विवेचक और थानाध्यक्ष को 27 अक्टूबर तक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिलने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत के अनुसार, थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति की नाबालिग पुत्री का तीन अक्टूबर को पड़ोसी गांव के एक व्यक्ति ने कथित रूप से अपहरण कर लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी होने पर बालिका के माता-पिता ने स्थानीय पुलिस को सूचना देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। आरोप है कि पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज करने के बजाय पीड़ित परिवार पर सुलह का दबाव बनाया और उन्हें कई दिनों तक थाने के चक्कर लगाने पड़े।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उच्चाधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद नौ अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया गया। मामला संज्ञान में आने के बाद न्याय पीठ बाल कल्याण समिति ने इसे गंभीरता से लिया। समिति ने प्रथम दृष्टया इसे किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 की मंशा के विपरीत मानते हुए बालिका के सर्वोत्तम हित को प्रभावित करने वाला प्रकरण माना है।
समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, डॉ. संतोष श्रीवास्तव और मंजू त्रिपाठी ने मामले के विवेचक तथा थानाध्यक्ष को पत्र भेजकर निर्धारित समय सीमा में स्पष्टीकरण देने को कहा है।
अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने कहा कि पॉक्सो पीड़िता को इस प्रकार थाने के चक्कर लगवाना बाल संरक्षण के उद्देश्यों के विपरीत है और इससे बच्चे के सर्वोत्तम हित प्रभावित होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल कल्याण समिति के लिए बाल हित सर्वोपरि है।

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