वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
गोरखपुर। महाप्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे उदय बोरवणकर के मार्गदर्शन में यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर में रेल कर्मचारियों के बच्चों के लिए "कौशल विकास एवं साहित्यिक कार्यशाला" का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि, रचनात्मक लेखन, मंच संचालन, संवाद कौशल, आत्मविश्वास और साहित्यिक संवेदनशीलता का विकास करना था।
मुख्य कारखाना प्रबंधक डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि मशीनें और तकनीक जहां जीवन को गति और सुविधा देती हैं, वहीं भाषा और साहित्य मनुष्य को संवेदनशील बनाते हैं। उन्होंने कहा कि रेल कर्मचारियों के बच्चे रेल परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और ऐसे कार्यक्रम उनके व्यक्तित्व विकास के साथ जीवनोपयोगी कौशल विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
कार्यशाला में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रो. प्रत्युष दूबे ने बच्चों को हिंदी साहित्य, रचनात्मक लेखन, भाषा की सुंदरता तथा विचारों को प्रभावी ढंग से शब्दों में व्यक्त करने की कला की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को समझने और संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का सशक्त माध्यम है।
मंचीय कवि विनीत पाण्डेय ने बच्चों को कविता पाठ, मंच प्रस्तुति, भाव-अभिव्यक्ति, संवाद शैली, आवाज के उतार-चढ़ाव और प्रभावी वक्तृत्व कला के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने बच्चों को आत्मविश्वास के साथ मंच पर अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, समाज और भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में भी अच्छी भाषा, स्पष्ट विचार और प्रभावी अभिव्यक्ति बच्चों को नई पहचान दिलाती है।
इस अवसर पर यांत्रिक कारखाना द्वारा "डिजिटलीकरण और हिंदी साहित्य" विषय पर रेलकर्मियों के बच्चों के लिए निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। बच्चों ने कविता पाठ, विचार प्रस्तुति और मंच संचालन में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसका संचालन स्वयं बच्चों ने किया, जिससे उन्हें सार्वजनिक मंच पर बोलने, कार्यक्रम संचालन और नेतृत्व का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

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