बस्ती। पतित पावनी मां मनोरमा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं सफाई को लेकर वर्षों से जनजागरण अभियान चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा जी’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मनोरमा नदी का उल्लेख किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे जनशक्ति और लंबे संघर्ष की बड़ी सफलता बताया।
सुदामा जी ने कहा कि जब अधिकांश लोग इस मुद्दे पर मौन थे, तब उन्होंने गांव-गांव जाकर, सोशल मीडिया के माध्यम से, ज्ञापन सौंपकर तथा जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर मनोरमा नदी की दुर्दशा का विषय लगातार उठाया। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को जागरूक करने का प्रयास किया गया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
उन्होंने बताया कि उनके अभियान को लजघटा के युवा आकाश गुप्ता सहित क्षेत्र के अन्य युवाओं का समर्थन मिला, जिससे यह जनआंदोलन और मजबूत हुआ। उसी जनचेतना का परिणाम है कि मनोरमा नदी का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा और प्रधानमंत्री ने भी इसका उल्लेख किया।
सुदामा जी ने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री देश के करोड़ों लोगों के बीच बैठकर मनोरमा नदी की चिंता कर सकते हैं, तो स्थानीय प्रशासन, संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठा सके। उन्होंने कहा कि अब केवल चर्चा या सोशल मीडिया पोस्ट से काम नहीं चलेगा, बल्कि नदी के पुनर्जीवन के लिए ठोस और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों से एकजुट होकर मनोरमा नदी के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि उनका संघर्ष नदी के अस्तित्व, क्षेत्र की आस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए निरंतर जारी रहेगा।

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