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Saturday, April 4, 2026

रुक्मिणी विवाह प्रेम भक्ति और सत्य की जीत का संदेश


बस्ती। बस्ती कांवरिया संघ चौरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन रुक्मिणी विवाह, गोवर्धन पर्वत उठाने, दहेज प्रथा को रोकने व प्रभु से संबंध बनाने के प्रसंग पर चर्चा की और लघु वीडियो फिल्म भी दिखाई। कथा व्यास शिवबली चौबे महराज ने बताया कि रुक्मिणी विवाह की कथा वास्तव में प्रेम, भक्ति, और सत्य की जीत का प्रतीक है। भगवान कृष्ण और रुक्मिणी की प्रेम कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम और भक्ति हमेशा जीतती है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।
रुक्मणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थी। रुक्मणी भगवान कृष्ण से प्रेम करती थी, लेकिन उसके भाई रुक्म ने उसका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। रुक्मणी ने कृष्ण को एक पत्र लिखकर अपनी स्थिति बताई और उन्हें अपनी रक्षा करने के लिए कहा। कृष्ण ने रुक्मणी को बचाने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने रुक्मणी के विवाह के दिन शिशुपाल के साथ लड़ाई की और रुक्मणी को अपने साथ ले गए। इस प्रकार, कृष्ण और रुक्मणी का विवाह हुआ। रुक्मणी विवाह का प्रसंग भगवान कृष्ण और रुक्मणी की प्रेम कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कथा प्रेम, भक्ति, और सत्य की जीत का संदेश देती है।
उन्होंने बताया कि स्त्री या पुरुष को निर्वस्त्र स्नान नहीं करना चाहिए। पद्मपुराण में उस घटना का जिक्र है जब नदी में निर्वस्त्र होकर स्नान करने के लिए गोपियां जाती हैं और तब उनके वस्त्र श्रीकृष्ण चुरा लेते  हैं। गोपियां, श्रीकृष्ण से बहुत प्रार्थना करती हैं कि वे उनके वस्त्र उन्हें लौटा दें लेकिन श्रीकृष्ण उन्हें स्वयं जल से बाहर निकलकर वस्त्र लेने के लिए कहते हैं। इस पर गोपियां उनसे विनम्रता से कहती हैं कि वे नग्नावस्था में जल से बाहर नहीं आ सकतीं तो श्रीकृष्ण उनसे कहते हैं कि तुम निर्वस्त्र होकर स्नान करने गई ही क्यों थी? गोपियों ने उत्तर दिया कि जब वे स्नान करने जा रही थीं तो वहां कोई नहीं था।
श्रीकृष्ण ने उनसे कहा, ऐसा तुम्हें लगता है। क्योंकि आसमान में उड़ रहे पक्षियों ने तुम्हें नग्नावस्था में देखा, जमीन पर छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़ों ने तुम्हें निर्वस्त्र देखा, यही नहीं पानी के जीवों ने और साथ ही स्वयं वरुण देव ने तुम्हें निर्वस्त्र देखा है। दहेज प्रथा का सामाजिक बहिष्कार करने की सलाह दी। बेटियों से बड़ा कोई धन नहीं है. इन्हें अच्छे संस्कार दें। दहेज में धन नहीं धार्मिक पुस्तकें पुस्तक दीजिए।
इस दौरान विवेक गिरोत्रा, संजय द्विवेदी, सुनील कुमार गुप्ता, गौरव साहू, सरदार प्रभुप्रीत सिंह, राजन गुप्ता, राम विनय पाण्डेय, पंकज त्रिपाठी, सूर्य कुमार शुक्ला, आनंद राजपाल,रोहन गुप्ता, विजय गुप्ता, दिनेश चंद्र जायसवाल, संतोष कुमार सिंह, धुव कुमार गुप्ता, रविंद्र तिवारी सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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