नई दिल्ली। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने गुरुवार को नई दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग में एक साथ मंच साझा किया। इस दौरान उन्होंने साझा विरासत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर चर्चा की। सुनक ने मजाकिया अंदाज में कहा, जैसा कि हमने इस हफ्ते सुना एआई बहुत कुछ कर सकता है। लेकिन यह अभी दिल्ली के ट्रैफिक को ठीक नहीं कर सकता है।
सुनक ने कहा, एआई बहुत कुछ कर सकता है, जैसा कि हमने इस हफ्ते देखा, लेकिन यह अभी दिल्ली के ट्रैफिक को नहीं सुधार सकता। लेकिन इस हफ्ते जो देखा गया, वह वास्तव में असाधारण था। यह सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का ही नहीं, बल्कि यहां मौजूद हर व्यक्ति की ऊर्जा का भी परिणाम है, जो इस तकनीक को विकसित करने और इस्तेमाल करने में लगी है। यह ऊर्जा दुनिया में कहीं और नहीं है। यही वजह है कि स्टैनफोर्ड की वैश्विक रैंकिंग के अनुसार भारत अब एआई सुपरपावर के रूप में प्रमुख स्थिति में है। यह आप सभी के लिए गर्व की बात है।
जब लैमी ने सुनक का परिचय दिया, तो उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक केवल ब्रिटेन के ही नहीं, बल्कि भारत के भी महान बेटे हैं। इस सुनक ने लैमी को रोकते हुए तुरंत मजाकिया लहजे में कहा- दामाद। इससे वहा मौजूद दर्शक भी हंस पड़े। इसके बाद लैमी ने भी मजाक में जवाब दिया- दामाद।
चर्चा के दौरान डेविड लैमी ने अपनी भारतीय जड़ों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उनकी परदादी कोलकाता से थीं। इसके ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के साथ अपनी दोस्ती की भी प्रशंसा की। लैमी ने अपने भारत से जुड़े संबंध को और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, मैं भी अपनी विरासत को स्थापित करना चाहता हूं, क्योंकि मेरी मां की ओर से मेरी परदादी कोलकाता की थीं।
लैमी ने जोर दिया कि भले ही उनका राजनीतिक दृष्टिकोण अलग हो, फिर भी वह मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से ब्रिटेन और पूरी दुनिया के लिए साझा लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी और सुनकी राजनीतिक पार्टी अलग-अलग हैं, लेकिन वे फिर भी साथ में काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, हम अलग-अलग राजनीतिक दलों से हैं। लेकिम हम साथ काम कर सकते हैं और कई वर्षों से दोस्त हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में यह बहुत खुशी की बात रही है कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री सुनक के साथ मिलकर प्रोस्टेट कैंसर के मामले में ब्रिटेन और पूरी दुनिया में सुधार लाने के अपने साझा लक्ष्य पर काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के राजनीतिक मतभेदों वाले मुद्दे पर उनके साथ काम करना उनके लिए आनंद की बात है।
जब चर्चा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर मुड़ी तो लैमी ने सुनक से कहा, आपने ब्लेचली पार्क में पहला वैश्विक एआई समिट शुरू किया। उस समय यह मुद्दा आपको क्यों अहम लगा? आपने दुनिया को यह बताने के लिए अपना मंच क्यों इस्तेमाल किया कि यह जरूरी है? और अब आपको लगता है कि इस कोशिश का क्या असर हुआ?
लैमी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब ब्रिटेन और भारत संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें व्यापार, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। ब्रिटेन और भारत दोनों अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीके तलाश रहे हैं।
इस पर जवाब देते हुए, सुनक ने लैमी का धन्यवाद किया और दर्शकों को नमस्ते कहा। उन्होंने चर्चा की शुरुआत एआई के वैश्विक महत्व और भारत-ब्रिटेन की बढ़ती तकनीकी साझेदारी से की। पूर्व प्रधानमंत्री सुनक ने कहा कि भारत एआई के भविष्य को आकार देने के लिए सबसे सही जगह है। उन्होंने कहा कि वैश्विक एआई बदलाव पर चर्चा करने के लिए 'इससे बेहतर जगह कोई नहीं' हो सकती। उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, नवाचार प्रणाली और लोगों के तकनीक के प्रति उत्साह को भी सराहा।
एआई इंपैक्ट समिट में मुख्य वक्ता के रूप में सुनक ने कहा कि भारत विशेष रूप से इस स्थिति में है कि वह एआई के अगले वैश्विक चरण को आगे बढ़ा सकता है। यह केवल विकसित देशों के लिए नहीं, बल्कि विकासशील देशों के लिए भी अहम है। सुनक ने कहा, हमें एक नियमित मंच की जरूरत है, जहां सभी लोग मिलकर एआई और उससे जुड़ी तकनीक पर चर्चा कर सकें। उन्होंने कहा कि इस समिट के जरिये यही मंच प्रदान किया गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह समिट असर डालेगा। उन्होंने कहा, इस समिट का उद्देश्य यह दिखाना है कि एआई को सिर्फ विकसित देशों के लिए ही नहीं, बल्कि विकासशील देशों के लिए भी काम में लाया जा सकता है।
सुनक ने कहा, एआई के बदलाव पर चर्चा करने के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि इस समिट के जरिये यह दिखाया जाएगा कि एआई कैसे स्वास्थ्य और शिक्षा को दुनिया के हर कोने में बेहतर बना सकता है और मानव गरिमा को बढ़ा सकता है।
सुनक ने कहा कि उन्होंने एआई के भविष्य को इस तरह विकसित करने का वादा किया है कि यह मानवता के लिए फायदेमंद हो। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अग्रणी प्रयोगशालाएं अब ब्रिटेन के एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर एआई मॉडल्स का परीक्षण कर रही हैं, ताकि इन्हें लागू करने से पहले सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि एआई की सुरक्षा और एआई की प्रगति दोनों साथ-साथ चलती हैं। जनता का भरोसा ही आखिरकार तय करेगा कि एआई कितना सफल होता है, खासकर सरकारी क्षेत्र में, जहां लोग सीधे तेज सेवाएं, बेहतर स्वास्थ्य सेवा और आसान सरकारी प्रक्रियाओं का अनुभव कर सकते हैं। सुनक ने यह भी कहा कि एआई पर बहस तब वास्तविक बनती है, जब लोग अपनी जिंदगी में इसके स्पष्ट और ठोस फायदे देख सकें।
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