बस्ती। ग्रामीणों के काम के अधिकार की रक्षा को लेकर कांग्रेस पार्टी ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। यह अभियान 10 से 25 फरवरी तक चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से कांग्रेस जमीनी स्तर पर जनता को यह जानकारी देगी कि भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर लागू किए गए नए वीबीजीआरएएमजी कानून से काम के अधिकार की वैधानिक गारंटी समाप्त कर दी गई है।
शनिवार को कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के उपाध्यक्ष डा. वाहिद अली सिद्दीकी, संदीप श्रीवास्तव, अलीम अख्तर, मनरेगा समन्वयक साधू शरन आर्य एवं कांग्रेस नेता डा. आलोक रंजन वर्मा ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका की रीढ़ रहा है। भाजपा सरकार ने नए कानून के माध्यम से इसकी मूल भावना पर हमला किया है, जिससे मजदूरों के अस्तित्व और उनके रोजगार के अधिकार पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह जनविरोधी है और पार्टी इसके खिलाफ चुप नहीं बैठेगी। 25 फरवरी तक चरणबद्ध आंदोलन कर इस मुद्दे को आम जनता तक पहुंचाया जाएगा और भाजपा सरकार की नीतियों को उजागर किया जाएगा।
उन्होंने आंदोलन के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास, 12 जनवरी को पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान, 30 जनवरी को वार्ड एवं ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरना, 31 जनवरी को जिला स्तरीय ‘मनरेगा बचाओ धरना’, 7 फरवरी को राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव तथा 16 से 25 फरवरी तक एआईसीसी के नेतृत्व में रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी जन-जन तक यह संदेश पहुंचाएगी कि मनरेगा की जगह नया कानून लाकर भाजपा सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर प्रहार कर रही है।
प्रेस वार्ता में चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डा. सुरेन्द्र चौधरी, अनिल तिवारी, बसंत कुमार चौधरी सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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