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Sunday, January 4, 2026

शाकभाजी की व्यवसायिक खेती कर किसान करें आय में वृद्धि - अरुण तिवारी


बस्ती। शाकभाजी की खेती को बढ़ावा देने के लिये सरकार निरंतर प्रयास कर रही है और तरह-तरह से प्रोत्साहित किया जा रहा है। शाकभाजी की खेती कर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं और विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकते हैं।

यह जानकारी देते हुए जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि टमाटर व मिर्च की फसल में विषाणु रोग का प्रकोप अधिक हो रहा है। यह सफेद मक्खी यानी कि हापर कीट के द्वारा होता है। इस बीमारी के रोक थाम के लिये फिप्रोनिल 5 प्रतिशत, एससी अपना इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत व एसएल 0.5 मिली लीटर को एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिझ़काव करें। साथ ही गोभी वर्गीय फसलों में डायमंड बैक मोथ का प्रकोप होने पर क्लोरेंटशनिलिप्रोल 0.5.1 मिली रसायन को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। बताया कि टमाटर और मिर्च फसल को झुलसा रोग से बचाव के लिए 0.2 प्रतिशत की दर से मैंकोजेब का छिड़काव करें। फसल को रस चूसक कीटों से बचाव के लिए नीम सीड कर्नल स्ट्रैक्ट 3-5 ग्राम या फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी 0.5-0.75 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। साथ ही आलू की फसल में झुलसा रोग की रोकथाम के लिये मैन्कोंजैब, प्रोपीनेब व कार्बेडाजिन युक्त फफूदनाशी की 2.0-2.5 किग्रा 1000 लीटर पानी में घोल प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। बताया कि जिन खेतों में बीमारी का प्रकोप हो चुका है, उनमें किसी भी फफूदनाशक-साईमोक्सेनिल 8 प्रतिशत व मैक्कोंजेब 64 प्रतिशत डब्लूपी का 2-2.5 किग्रा 1000 लीटर पानी में घोलकर 16-16 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि पोर्टल पर शाकभाजी की खेती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण डीबीटी डॉट यूपी हार्टिकल्चर पर जाकर किया जा सकता है, या फिर किसी कार्य दिवस में कृषक आवश्यक दस्तावेज-आधार कार्ड, बैंक पासबुक, भूमि अभिलेख, एक फोटो व मोबाइल नंबर लाकर कार्यालय में पंजीकरण करा सकते हैं।


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