वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
लखनऊ। भारतीय सेना और उत्तर प्रदेश सरकार के समन्वित प्रयासों से दिवंगत टेरिटोरियल आर्मी अधिकारी की पुत्री मिस अंजना भट्ट को उनका पैतृक आवास विधिसम्मत तरीके से पुनः प्राप्त हुआ। यह मामला न केवल सशक्त सैन्य–नागरिक समन्वय का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय सेना अपने कार्मिकों और उनके परिवारों के साथ हर परिस्थिति में मजबूती से खड़ी रहती है।
मिस अंजना भट्ट, एक दिवंगत टेरिटोरियल आर्मी अधिकारी की पुत्री हैं। पारिवारिक सहयोग के अभाव और असामाजिक तत्वों द्वारा पैतृक आवास पर अवैध कब्जे के कारण उन्हें लंबे समय तक व्यक्तिगत, चिकित्सकीय और कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मध्य उत्तर प्रदेश सब एरिया के तत्वावधान में भारतीय सेना ने उनकी सुरक्षा, कल्याण और न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उठाई।
सेना द्वारा निरंतर निगरानी, संस्थागत सहयोग और नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे मामले का विस्तृत आकलन किया गया। इसके बाद विधिक प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, शांतिपूर्ण और समयबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
इस दौरान मेजर विशाल कनौजिया को औपचारिक रूप से मिस अंजना भट्ट का फोस्टर अभिभावक नियुक्त किया गया। उन्होंने कानूनी कार्यवाहियों की निगरानी के साथ-साथ कठिन समय में उन्हें व्यक्तिगत सहयोग भी प्रदान किया, जिससे आगे किसी प्रकार के शोषण को रोका जा सका।
लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप 01 जनवरी 2026 को पैतृक संपत्ति को मुक्त कराकर विधिवत रूप से उन्हें सौंप दिया गया। इसके उपरांत मिस अंजना भट्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर राज्य सरकार और प्रशासन के संवेदनशील सहयोग के लिए आभार जताया। उनके साथ मेजर जनरल मनीष कुकरेती, श्रीमती संगीता कुकरेती एवं मेजर विशाल कनौजिया भी उपस्थित रहे।
यह प्रकरण न्याय, करुणा और जिम्मेदार शासन की मिसाल बनकर सामने आया है।

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