बस्ती। वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के ध्वस्तीकरण तथा माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को क्षति पहुंचाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर कांग्रेस पदाधिकारियों व नेताओं ने जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी के नेतृत्व में राज्यपाल को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा।
ज्ञापन में मणिकर्णिका घाट के ध्वस्तीकरण की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराकर दोषी व्यक्तियों और अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही घाट का पुनर्निर्माण कराने, माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित करने तथा घाटों के सौंदर्यीकरण व विकास कार्य काशीवासियों, धर्माचार्यों और जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद ही कराए जाने की मांग शामिल है।
ज्ञापन सौंपने के बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि वर्ष 1791 में माता अहिल्याबाई होल्कर द्वारा मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार कराया गया था। ध्वस्तीकरण के बाद उनकी पवित्र एवं प्रतिष्ठित प्रतिमा का मलबे में दब जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। यह कृत्य हमारी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत पर सीधा प्रहार है तथा काशीवासियों सहित पूरे देश की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
कांग्रेस नेताओं राम भवन शुक्ला, डॉ. वाहिद अली सिद्दीकी, संदीप श्रीवास्तव, अलीम अख्तर और शौकत अली नन्हू ने कहा कि विरासत के विकास के नाम पर उसका ध्वस्तीकरण करना, तथ्यों को छिपाना और सच्चाई सामने लाने वालों पर मुकदमे दर्ज कर भय का माहौल बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को विरासत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
इस दौरान जयंत चौधरी, अनिल भारती, कौशल त्रिपाठी, राम धीरज चौधरी, साधु शरण आर्य, शिव विभूति मिश्रा, मोहम्मद रफीक, अमरदेव सिंह, गुड्डू सोनकर, शेर मोहम्मद, अमर बहादुर शुक्ला सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

No comments:
Post a Comment