वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
पांडुचेरी। पांडिच्चेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत ‘भाषा प्रौद्योगिकी के लिए एआई, जेन-एआई और बिहेवियरल एआई’ विषय पर 58वीं अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन 07 जनवरी 2026 को सायं 6 बजे (भारतीय समयानुसार) किया गया। यह कार्यशाला भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के ‘स्वयम्’ पोर्टल पर संचालित निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम ‘भाषा प्रौद्योगिकी का परिचय’ के अंतर्गत आयोजित की गई।
यह कार्यशाला भाषा प्रौद्योगिकी पखवाड़ा (03 जनवरी 2026 – 16 जनवरी 2026) के अंतर्गत आयोजित की जा रही साप्ताहिक कार्यशाला श्रृंखला का हिस्सा है। यह पखवाड़ा सावित्रीबाई फुले जयंती से राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस तक समावेशी शिक्षा, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तथा डिजिटल युग में भारतीय भाषाओं के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से मनाया जा रहा है।
कार्यशाला में सी-डैक, दिल्ली की वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं न्यूरो-कॉग्निटिव एआई समूह की प्रमुख डॉ. प्रियंका जैन ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने एआई, जेन-एआई एवं बिहेवियरल एआई के माध्यम से भाषा प्रौद्योगिकी के नवाचारों, अनुसंधान संभावनाओं और व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने की, जबकि संचालन उमेश कुमार प्रजापति ‘अलख’ ने किया। डॉ. प्रियंका जैन को एआई के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है तथा उन्हें विज्ञान लेखन एवं अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा अवसर -2019 पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे सी-डैक दिल्ली के न्यूरो-कॉग्निटिव एआई एवं एक्सआर समूह का नेतृत्व कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि भाषा प्रौद्योगिकी का यह निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम 13 जनवरी 2026 से ‘स्वयम्’ पोर्टल पर आरंभ होगा, जिसमें इच्छुक प्रतिभागी पंजीकरण कर सकते हैं। पांडिच्चेरी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यशालाओं में भाग लेने के लिए प्रतिभागी गूगल मीट लिंक मीट डॉट गूगल डॉट कॉम / आर्ट- टायू-पीएमओ के माध्यम से भी जुड़ सकते हैं।
भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक, सामाजिक और तकनीकी पुनर्स्थापना के उद्देश्य से आयोजित यह पहल भारत को डिजिटल लोकतंत्र की दिशा में सशक्त बनाने का प्रयास रहा।

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