बस्ती। रविवार को वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति द्वारा कलेक्टेट परिसर स्थित शिविर कार्यालय में विश्व हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। समिति के महामंत्री वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा के संयोजन में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने हिंदी भाषा के महत्व और उसकी वैश्विक पहचान पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक एवं साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत करने के उद्देश्य से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था, जिसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। डा. वर्मा ने यह भी कहा कि हिंदी अब सिर्फ साहित्य और बातचीत तक सीमित नहीं, बल्कि तकनीक, कोडिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि हिंदी देश के करोड़ों लोगों को आपस में जोड़ने का माध्यम है। भारत में अनेक भाषाओं और बोलियों के बीच हिंदी सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। उन्होंने बताया कि विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग भी हिंदी के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हैं। इस साल विश्व हिंदी दिवस की थीम है: ‘हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’।
गोष्ठी को वरिष्ठ कवि डा. राम कृष्ण ‘जगमग’, बी.के. मिश्र, बटुक नाथ शुक्ल, रामदत्त जोशी, जगदम्बा प्रसाद ‘भावुक’, तौव्वाब अली, सुशील सिंह पथिक, पेशकार मिश्र आदि ने सम्बोधित किया। उन्होंने बताया कि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में आधिकारिक तौर पर पहली बार 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा घोषित किया गया था। इसके बाद से विदेशों में भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक केंद्रों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे।
गोष्ठी में प्रमुख रूप से सामईन फारूकी, नेबूलाल, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, अफजल हुसेन अफजल, गणेश प्रसाद, दीननाथ यादव आदि उपस्थित रहे।

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