लखनऊ/सीतापुर। उत्तर प्रदेश में रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में रोसा–सीतापुर कैंट–बुरहवाल रेल दोहरीकरण परियोजना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। 2,560 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह 180 किलोमीटर लंबी डबल लाइन परियोजना 13 फरवरी 2024 को कमीशन कर दी गई, जिससे राज्य के कृषि, उद्योग और यात्री परिवहन को नई गति मिली है।
यह परियोजना नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के अत्यंत व्यस्त खंड पर सिंगल लाइन की वर्षों पुरानी बाधा को दूर करने के लिए स्वीकृत की गई थी। इस मार्ग पर प्रतिदिन 100 से अधिक यात्री और मालगाड़ियां संचालित होती हैं, जिससे अक्सर ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता था। दोहरीकरण के बाद अब ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु, तेज और समयबद्ध हो गई है।
हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृति जैसी जटिल चुनौतियां सामने आईं। सीतापुर जिले में निजी भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों और वन विभाग से स्टेज-I स्वीकृति में देरी के कारण कार्य की गति प्रभावित होने लगी थी। इन मुद्दों को प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के माध्यम से केंद्र सरकार के संज्ञान में लाया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परियोजना की समीक्षा 31 जुलाई 2019 को माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में प्रगति बैठक में की गई। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रेलवे मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार को आपसी समन्वय से लंबित मुद्दों को शीघ्र सुलझाने के स्पष्ट निर्देश दिए। राज्य सरकार को शेष भूमि अधिग्रहण समयबद्ध रूप से पूरा कर रेलवे को सौंपने के लिए कहा गया, जबकि रेलवे मंत्रालय को मिशन मोड में कार्य तेज करने के निर्देश मिले।
प्रगति के बाद बहु-एजेंसी समन्वय का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वन स्वीकृति प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया गया और सीतापुर जिला प्रशासन ने 212 किसानों से सहमति के आधार पर भूमि अधिग्रहण पूरा किया। किसानों को सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा देकर रजिस्ट्रियां और म्यूटेशन की प्रक्रिया भी समय से पहले पूरी की गई। इससे ट्रैक बिछाने, विद्युतीकरण और सिग्नलिंग का कार्य समानांतर रूप से आगे बढ़ सका।
परियोजना के पूरा होने से उत्तर प्रदेश की कृषि और चीनी बेल्ट को बड़ा लाभ मिला है। खाद्यान्न, चीनी और सीमेंट की ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे लॉजिस्टिक लागत कम हुई और उत्पादकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है। वहीं, सीतापुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी के यात्रियों को अब लखनऊ और दिल्ली के लिए अधिक विश्वसनीय और तेज रेल सेवाएं मिल रही हैं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना प्रगति और डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से जटिल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का एक सफल उदाहरण है। यह न केवल उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत करती है, बल्कि समावेशी विकास के लिए रेलवे को एक मजबूत आधार भी प्रदान करती है।

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