सरस्वती शिशु मंदिर में गुरु पूर्णिमा : गुरु सदानंद पाण्डेय ने किया संबोधित, ज्ञान के महत्व पर दिया ज़ोर
गोरखपुर। सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर, आचार्य सदानंद पाण्डेय ने अपने ओजस्वी संबोधन में गुरु के असाधारण महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।’’
गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व, समस्त गुरुओं के गुरु माने जाने वाले महर्षि वेद व्यास के जन्मदिन के रूप में विशेष महत्व रखता है।
अपने संबोधन में, गुरु सदानंद पाण्डेय ने ‘गुरु’ शब्द के गहरे अर्थ को समझाया। उन्होंने बताया कि ‘गु’ का अर्थ अंधकार या अज्ञान है, जबकि श्रुश् का अर्थ प्रकाश है। इस प्रकार, उन्होंने कहा, ‘‘गुरु वह दिव्य शक्ति है जो हमें अज्ञानता के गहन अंधकार से निकालकर ज्ञान के आलोक की ओर ले जाती है।’’ उन्होंने इस पर्व को ज्ञान, शिक्षा, आध्यात्मिक विकास और सामाजिक एकता के महत्व को समझने के साथ-साथ गुरुओं के प्रति हमारी कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सुनहरा अवसर बताया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉक्टर राजेश सिंह ने इस अवसर पर समस्त विद्यालय परिवार को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गुरु के महत्व को दोहराते हुए कहा कि बिना गुरु के ज्ञान अधूरा रहता है और गुरु ही हमें जीवन की हर कठिनाई से पार पाने में सहायता करता है।
इस पवित्र अवसर पर, विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य और हिंदी प्रवक्ता निर्मल यादव, जिन्होंने हाल ही में सेवानिवृत्ति ली है, उन्हें भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान विद्यालय परिवार की ओर से उनके अमूल्य योगदान और समर्पित सेवा के प्रति हार्दिक आभार का प्रतीक था।

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