नई दिल्ली। भारत और कनाडा ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक साझा कार्ययोजना (वर्क प्लान) तैयार की है। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के यहां सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन से जुड़े संपर्क अधिकारी (लायजन ऑफिसर) नियुक्त करेंगे। इसका मकसद नशा तस्करी, अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोह और अन्य साझा चिंताओं से मिलकर निपटना है।
- क्या सामान्य हो गए रिश्ते
यह फैसला शनिवार को ओटावा में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कनाडा की उनकी समकक्ष नथाली ड्रोइन के बीच हुई बैठक में लिया गया। यह कदम 2023 में अलगाववादी की हत्या को लेकर दोनों देशों के बीच पैदा हुए राजनयिक विवाद के बाद रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
- दोनों देशों के बीच किस बात पर बनी सहमति
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अजीत डोभाल की यह यात्रा दोनों देशों के बीच होने वाले नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा संवाद का हिस्सा थी। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में आपसी सहयोग को एक ठोस दिशा दी जाएगी।
- ऐसे कसेगी ड्रग तस्करी पर लगाम
दोनों देशों ने यह भी तय किया कि वे अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाएंगे और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाएगा। इससे सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान हो सकेगा, खासकर अवैध ड्रग तस्करी, फेंटेनाइल जैसे खतरनाक नशे के कच्चे माल और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
- इन मुद्दों पर भी फोकस
इसके अलावा, भारत और कनाडा ने साइबर सुरक्षा नीति और साइबर मामलों में सूचना साझा करने पर औपचारिक सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। धोखाधड़ी और इमिग्रेशन कानून लागू करने से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत जारी रखने का फैसला हुआ है। अजीत डोभाल ने इस दौरान कनाडा के पब्लिक सेफ्टी मंत्री गैरी आनंदसंगरी से भी मुलाकात की।
- क्यों आ गया था दोनों देशों के बीच तनाव
बता दें कि भारत-कनाडा रिश्तों में उस समय बड़ा तनाव आ गया था, जब सितंबर 2023 में कनाडाई पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट्स की संलिप्तता का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें श्बेतुकाश् बताया था।
- नए पीएम के आते ही दोनों देश आ रहे करीब
इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, 2024 के अंत से दोनों देशों ने खामोशी से सुरक्षा और खुफिया सहयोग फिर से शुरू किया। कनाडा में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों पक्षों ने रिश्ते सुधारने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं।
No comments:
Post a Comment