बस्ती। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अन्तर्गत जनपद में कोविड से मॉ-बाप को खोने वाले 233 बच्चों को प्रतिमाह 4000 रूपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। पति-पत्नी दोनों को सजा हुयी है, तो उनके बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सम्मान सेवा योजना के तहत ढाई हजार रूपये दिया जायेंगा। सभी स्कूल एवं कालेज परिसर के 100 मीटर के भीतर पान, बीडी, सिगरेट की दुकान बन्द करवाने के लिए निर्देशित किया है। ये बातें अध्यक्ष, (राज्यमंत्री स्तर), उ0प्र0, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग डा. देवेन्द्र शर्मा ने सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता के दौरान बतायी।
उन्होने कहा कि हमें अपनी युवा पीढी को नशे से मुक्त कराने के लिए सक्रिय होना होंगा। उन्होने कहा कि प्रत्येक स्कूल एवं कालेज में एक अध्यापक की अध्यक्षता में आधा दर्जन छात्र-छात्राओंयुक्त प्रहरीक्लब गठित किया जायेंगा, जो मानीटरिंग करेंगा की कालेज का कोई छात्र-छात्रा नशा ना करता हों। प्रत्येक पखवाड़े क्लब बैठक करके इसकी समीक्षा भी करेंगा। प्रहरीक्लब के अध्यक्ष एवं सदस्य का मोबाइल नम्बर विद्यालय में सूचना पट्ट पर प्रदर्शित किया जाय।
उन्होने बताया कि जिला अस्पताल, सखी वन स्टाप सेण्टर, प्राथमिक विद्यालय भुअर निरंजनपुर, जिला कारागार, बाल सम्प्रेक्षण गृह पचपेड़िया तथा कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय बहादुरपुर का निरीक्षण किया। जिला अस्पताल के निरीक्षण में उन्होने एनआरसी, जनरल, पीआईसी वार्ड को देखा व मरीजो के अभिवावको से बात किया। एनआरसी में किचन की व्यवस्था को देखा और सीएमओ को आवश्यक दिशा निर्देश दिया। एनआरसी में कुल 07 बच्चे भर्ती पायें गये, उन्होने प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि एनजीओ के माध्यम से बच्चों के लिए खिलौने आदि की व्यवस्था करायें। उन्होने कहा कि सभी वार्डाे को अच्छी तरह से साफ-सफाई रखें। उन्होने सखी वन स्टाप सेण्टर में उपस्थिति पंजिका को देखा और वहॉ पर उपस्थित काउंसलरों से वार्ता किया। इस संबंध में उन्होने कहा कि यहॉ आने वाले मरीजो से अच्छा व्यवहार व बेहतर इलाज की सुविधा हों।
प्राथमिक विद्यालय के निरीक्षण में बच्चों के पढाई की क्षमता को जाना। इस दौरान उन्होने कई बच्चों से कविता, पहाड़ा पढवाकर सुना व बच्चों ने संतोषजनक उत्तर दिया। बच्चों की उपस्थिति पूरी सुनिश्चित हो, इसके लिए बीएसए को निर्देश दिया है कि बच्चों के अभिभावक को बुलाकर हर 15 दिन में मीटिंग किया जाय ताकि अभिवावकों को उनके बच्चे के बारे में जानकारी हो। अभिवावकों को प्रेरित किया जाय कि बच्चों को स्कूल अवश्य भेंजे, जिससे बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सकें। उन्होने यह भी कहा कि विद्यालय को माड्ल स्कूल के रूप में विकसित किया जाय। उन्होने बच्चों के खेलने के लिए कैरम, फुटबाल व हॉकी हेतु रू0 05 हजार स्पांसर योजनान्तर्गत देने के लिए संबंधित को निर्देशित किया है। इस अवसर पर उन्होने 2 गर्भवती माताओं की गोदभराई तथा 2 बच्चों का अन्नप्राशन किया।
उन्होने बताया कि जेल निरीक्षण के दौरान महिला कैदियों से वार्ता करके उनका हाल जाना। वहॉ क्रेच सेन्टर को देखा। संबंधित को निर्देशित किया कि पति-पत्नी दोनों को सजा हुयी है, तो उनके बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सम्मान सेवा योजना के तहत ढाई हजार रूपये दिया जायेंगा। सेन्टर में आगनवाड़ी कार्यकत्री की व्यवस्था करने को निर्देशित किया है।
कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय के निरीक्षण में उन्होने छात्राओं से उनके लक्ष्य के बारे में पूछा और उन्होने कहा कि हमें अपने लक्ष्य के प्रप्ति के लिए दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम, कठोर तपश्या करनी पड़ती है, जैसे एक चीटी दीवाल पर चढती है और गिरती है, फिर चढती है, इसी प्रकार हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए। उन्होने कक्षा 6 से 8 तक के छात्राओं से चंद्रयान के बारे में पूछा, जिस पर छात्र-छात्राओं द्वारा संतोषजनक व बेहतर जवाब दिया गया। बच्चों ने कहा कि यह हमारे देश के लिए गौरव की बात है। उन्होने बताया कि बच्चों में चन्द्रयान के विषय को लेकर काफी जिज्ञासा है। उन्होने छात्राओं के खेलने के लिए 4 बैडमिंटन, 02 रस्सी उपलब्ध कराने हेतु बीएसए को निर्देशित किया है।
उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री बाल सामान्य योजनान्तर्गत जेल में रहने वाले मॉ-बाप के 144 बच्चों को रू0 ढाई हजार प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होने बताया कि कोविड से मॉ या बाप में से किसी एक को खोने वाले कक्षा-9 या इसके ऊपर की कक्षा के 76 बच्चों को लैपटाप वितरित किया गया है। जनपद में 20 हजार लड़कियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अन्तर्गत रूपये 15 हजार की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होने बताया कि श्रम विभाग द्वारा संचालित ई-श्रम कार्ड का लाभ आशा, एएनएम, आगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिका, महिला स्वीपर, रसोईया को दिया जा रहा है। इसके अन्तर्गत उनका 02 लाख रूपये का बीमा होता है तथा 05 लाख रूपये तक का निःशुल्क इलाज दिलाया जाता है। उन्होने बताया कि कौशल विकास योजना के अन्तर्गत 04 राजकीय विद्यालयों में 560 छात्रों को प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।
उन्होने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा जनपद के 249 परिषदीय विद्यालयों की बाउंड्रीवाल के लिए धनराशि उपलब्ध करायी गयी है। शिक्षा का अधिकार के अन्तर्गत 156 छात्र-छात्राओं का पंजीकरण किया गया है, जिसमें से 46 बच्चों का कान्वेंट स्कूलों में निःशुल्क दाखिला कराया गया है। प्रेसवार्ता के दौरान अपर जिलाधिकारी कमलेश चन्द्र, सीएमओ डा. आर.पी. मिश्रा, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्र भी उपस्थित रहें।
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