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Tuesday, April 5, 2022

संकल्पों के साथ मनायी गयी निषाद राजा गुह्य की जयंती

 - निषादराज गुह्य की जयंती पर गोताखोर मिथलेश निषाद सम्मानित

बस्ती । मंगलवार को ई. राजबहादुर निषाद के संयोजन में प्रेस क्लब के सभागार में निषादों के राजा गुह्य की जयंती संकल्पों के साथ मनाया गया। मुख्य अतिथि डा. जगराम निषाद ने कहा कि निषाद समाज का अतीत जितना उज्जवल रहा है उनका वर्तमान उतना ही संकटपूर्ण है। कहा कि राजा गुह्य को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि निषाद समाज राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक स्तर पर मजबूत हो। इस अवसर पर गोताखोर मिथलेश निषाद को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

कार्यक्रम संयोजक ई. राजबहादुर निषाद ने कहा कि निषाद जाति भारतवर्ष की मूल एवं प्राचीनतम जातियों में से एक हैं। रामायणकाल में निषादों की अपनी अलग सत्ता एवं संस्कृति थी, एवं निषाद एक जाति नहीं बल्कि चारों वर्ण से अलग ‘पंचम वर्ण’ के नाम से जाना जाता था। स्वतंत्रता आन्दोलन में भी इस समुदाय के शूरवीरों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, लेकिन आज इस समुदाय के लोंगो में वैचारिक भिन्नता के कारण समुदाय का विकास अवरुद्ध सा हो गया है। ऐसे में हमें अपनी एकजुटता बढानी होगी।

निषादों के राजा गुह्य की जयंती अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को श्यामलाल निषाद, आर.डी. निषाद, सोमनाथ निषाद ‘संत जी’  आदि ने सम्बोधित किया। कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम को गंगा पार कराने वाले निषाद समाज की स्थिति तभी बेहतर होगी जब वे संसाधनों और विचारधारा के स्तर पर मजबूत हो।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से ओंकार निषाद, अभिषेक साहनी, पंकज निषाद, अवधेश निषाद, कैलाश निषाद, शशिकान्त निषाद, बब्बन शाहनी, जितेन्द्र निषाद, संदीप निषाद, अनिल निषाद, संदीप, सत्यराम निषाद, प्रेमचन्द्र निषाद, शत्रुघ्न निषाद,  अम्बिका निषाद, सोनू निषाद के साथ ही निषाद समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे। 

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