बस्ती। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में सोमवार को छात्रों में नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का विकास विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन डायट प्राचार्य संजय कुमार शुक्ल के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। सेमिनार में जनपद के समस्त विकासखंडों से कुल 45 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया तथा निर्धारित विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने विद्यालयी जीवन में नैतिक मूल्यों के व्यवहारिक क्रियान्वयन, सामाजिक उत्तरदायित्व, सहानुभूति, अनुशासन एवं जीवन कौशल के महत्व पर विस्तृत विचार प्रस्तुत किए। मुख्य वक्ता शिव हर्ष किसान पी०जी० कॉलेज की प्राचार्या प्रो० (डॉ०) रीना पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि नैतिक शिक्षा केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों के लिए आदर्श बनें और व्यवहार के माध्यम से मूल्यों का संचार करें।
विशिष्ट वक्ता डॉ० राजेश सिंह और ओम प्रकाश आर्य ने भारतीय संस्कृति एवं साहित्य में निहित नैतिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। दोनों ने शिक्षण प्रक्रिया में नैतिक प्रसंगों को शामिल करने पर बल दिया एवं वसुधैव कुटुंब को अपनाने कि बात कही। डायट प्राचार्य ने कहा कि शिक्षक ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के मुख्य स्तम्भ हैं। उन्होंने इस प्रकार के सेमिनारों को शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया तथा सभी प्रतिभागियों को मूल्य आधारित शिक्षा को अपने दैनिक शिक्षण में अपनाने हेतु प्रेरित किया। नोडल प्रवक्ता वंदना चौधरी ने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिकता, संवेदनशीलता एवं मानवीय मूल्यों के विकास हेतु शिक्षकों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना था। कार्यक्रम का संचालन डॉ० ऋचा शुक्ला एवं डॉ० रविनाथ द्वारा किया गया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
इस अवसर पर प्रवक्ता शशि दर्शन त्रिपाठी, डॉ गोविन्द प्रसाद, अलीउद्दीन, मो. इमरान खान, कुलदीप चौधरी, रमेश विश्कर्मा, अजय कुमार पाण्डेय, अन्नपूर्णा दुबे, आदित्य प्रकाश, सरिता त्रिपाठी आदि उपस्तिथि रहे।
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