झांसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के झांसी नोड में अत्याधुनिक काउंटर-ड्रोन प्रणाली ‘द्रोणम’ का निर्माण किया जाएगा। ‘ब्लैक गन’ के नाम से चर्चित इस एंटी-ड्रोन सिस्टम ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन कर सुरक्षा एजेंसियों का भरोसा जीता था। हाल ही में इसे गणतंत्र दिवस परेड में भी प्रदर्शित किया गया और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित किया गया।
- 150 करोड़ का निवेश, 380 लोगों को रोजगार
कॉरिडोर के झांसी नोड में गुरुत्व सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को 10 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। कंपनी काउंटर-ड्रोन तकनीक में विशेषज्ञता रखती है और ‘द्रोणम’ प्रणाली का निर्माण करेगी। इस परियोजना में लगभग 150 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे करीब 380 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।वहीं लखनऊ नोड में नेक्सा मुंबई को 0.5 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। यह कंपनी एविएशन और रक्षा प्रणालियों के कैलिब्रेशन के लिए कंट्रोल पैनल, टेस्ट रिग्स और टेस्ट बेंच तैयार करती है। कंपनी लगभग पांच करोड़ रुपये का निवेश कर 60 लोगों को रोजगार देगी।‘द्रोणम’ में उन्नत जैमिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो 1 से 8 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन की पहचान कर उन्हें जाम कर निष्क्रिय कर सकता है। यह दुश्मन ड्रोन के कम्युनिकेशन और नेविगेशन सिस्टम को बाधित कर उसे गिराने में सक्षम है।
- यह प्रणाली कई रूपों में उपयोग की जा सकती है :
1. राइफल की तरह हाथ में पकड़कर चलाने योग्य एंटी-ड्रोन गन
2. बैगपैक मॉडल, जिसे पीठ पर पहनकर फील्ड ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है
3. वाहन या स्थायी स्थान पर स्थापित 360 डिग्री निगरानी प्रणाली
- सीमा और आंतरिक सुरक्षा में बड़ी भूमिका
‘द्रोणम’ को सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात किया जा सकता है। वर्ष 2024 में इस तकनीक की मदद से 260 से अधिक ड्रोन नष्ट किए गए, जिनके माध्यम से हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स की तस्करी की जा रही थी।पंजाब सीमा पर ड्रोन घुसपैठ को निष्क्रिय करने की दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 55 प्रतिशत तक पहुंचने में इस प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि झांसी में ‘द्रोणम’ के निर्माण से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश की सामरिक क्षमता को भी मजबूती मिलेगी और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
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