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Sunday, January 11, 2026

युगों तक प्रेरणा देते रहेंगे स्वामी विवेकानन्द – डॉ. वी.के. वर्मा

वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता


बस्ती। स्वामी विवेकानन्द जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को कबीर साहित्य सेवा संस्थान द्वारा प्रेस क्लब सभागार में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन साईमन फारूकी ने किया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक एवं साहित्यकार डॉ. वी.के. वर्मा रहे।

डॉ. वर्मा ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन-वृत्त और उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस समय भारत अनेक टुकड़ों में बंटा हुआ था तथा भुखमरी और महामारी से देश के कई हिस्से जूझ रहे थे, उस दौर में एक युवा सन्यासी ने देश को नई ऊर्जा दी। शिकागो के ऐतिहासिक भाषण से उन्होंने विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई। उन्होंने धर्म को जीवन से जोड़ा और मानव सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया। मुसीबत के समय वे होम्योपैथी की दवाइयां लेकर जनसेवा में निकल पड़ते थे। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे महान व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए।

संगोष्ठी में वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा, अजीत श्रीवास्तव ‘राज’, तौव्वाब अली, डॉ. वाहिद अली सिद्दीकी, टी.पी. मिश्र, अर्चना श्रीवास्तव, अनुरोध कुमार श्रीवास्तव, सुशील सिंह ‘पथिक’ सहित अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस के निधन के बाद स्वामी विवेकानन्द के जीवन में नया मोड़ आया। मात्र 25 वर्ष की अवस्था में उन्होंने गेरुआ वस्त्र धारण कर संपूर्ण भारतवर्ष की पैदल यात्रा की। देश की गरीबी, सामाजिक बुराइयों और दयनीय परिस्थितियों को देखकर वे व्यथित रहे, लेकिन आगे चलकर करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत बने।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द स्वयं को सदैव गरीबों का सेवक मानते थे। उन्होंने भारत के गौरव को देश-विदेश में उज्ज्वल करने का सतत प्रयास किया। आज आवश्यकता है कि इसी परंपरा को आगे बढ़ाया जाए और युवा वर्ग उनके जीवन से प्रेरणा ग्रहण करे।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार दीपक सिंह ‘प्रेमी’ ने किया। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी जी सभी धर्मों का सम्मान करते थे, इसी कारण उन्हें सभी धर्मानुयायियों में आदर प्राप्त है।

आयोजक साईमन फारूकी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का दृढ़ विश्वास था कि अध्यात्म विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा। उन्होंने भारतीय दर्शन को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया।

इस अवसर पर शाद अहमद शाद, अमित कुमार उपाध्याय, राहुल चौहान, सागर गोरखपुरी, चन्द्रमोहन लाल श्रीवास्तव, ओमैसी, संतोष श्रीवास्तव, संजीव पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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