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Friday, January 9, 2026

चिकनकारी की कहानी कहने वाली लखनऊ की फिल्म ‘अंजुमन’ को मिला राष्ट्रीय संरक्षण

वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता


नई दिल्ली। प्रसिद्ध फ़िल्मकार मुज़फ़्फ़र अली ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपनी पुरस्कार–प्राप्त हिन्दी फ़िल्म अंजुमन (वर्ष 1986) की दुर्लभ 35 मिलीमीटर फ़िल्म प्रति राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम–राष्ट्रीय फ़िल्म अभिलेखागार को दान की। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में यह प्रति राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम को औपचारिक रूप से सौंपी गई।

फ़िल्म अंजुमन का उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ से गहरा सांस्कृतिक संबंध है। फ़िल्म की अधिकांश शूटिंग पुराने लखनऊ में की गई थी। इसमें लखनऊ की तहज़ीब, नफ़ासत और पारंपरिक हस्तशिल्प परंपराओं का सजीव चित्रण किया गया है। फ़िल्म प्रसिद्ध चिकनकारी कारीगरी से जुड़ी महिलाओं के जीवन, उनकी कला और उन्हें झेलनी पड़ने वाली सामाजिक तथा आर्थिक कठिनाइयों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।

वर्ष 1986 में अंजुमन को भारतीय पैनोरमा की आधिकारिक चयनित फ़िल्मों में स्थान मिला था। इसके अतिरिक्त फ़िल्म का प्रदर्शन वैंकूवर और तेहरान जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में भी किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलने के बावजूद यह फ़िल्म व्यावसायिक रूप से सिनेमा घरों में प्रदर्शित नहीं हो सकी।

इस अवसर पर मुज़फ़्फ़र अली ने कहा कि राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम–राष्ट्रीय फ़िल्म अभिलेखागार द्वारा किया जा रहा संरक्षण कार्य फ़िल्म जगत के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सेल्युलॉइड माध्यम अत्यंत नाज़ुक होता है और समय के साथ रंगों तथा छवियों का नष्ट होना पीड़ादायक होता है। उनके अनुसार फ़िल्म संरक्षण कोई व्यवसाय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सेतु का निर्माण है, जिसे केवल राष्ट्रीय दृष्टिकोण से ही संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंजुमन जैसी फ़िल्म, जो लखनऊ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा को दर्शाती है, उसका सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम ने कहा कि देश की सिनेमाई धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखना समय की आवश्यकता है। भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन इस दिशा में एक सशक्त पहल है। उन्होंने अंजुमन की प्रति दान करने के लिए मुज़फ़्फ़र अली के प्रति आभार व्यक्त किया और फ़िल्म जगत से जुड़े सभी लोगों से संरक्षण कार्य में सहयोग की अपील की।

उल्लेखनीय है कि अंजुमन हिन्दी सिनेमा की एक विशिष्ट कलात्मक कृति मानी जाती है। फ़िल्म की मुख्य अभिनेत्री शबाना आज़मी ने संगीतकार ख़य्याम के निर्देशन में स्वयं अपने गीत गाए थे। इन गीतों के बोल प्रसिद्ध शायर शाहरीयार और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ द्वारा लिखे गए थे। इस प्रकार अंजुमन न केवल एक महत्वपूर्ण फ़िल्म है, बल्कि लखनऊ तथा उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक विरासत का अमूल्य दस्तावेज़ भी है।

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