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Monday, March 27, 2023

शरणागत की रक्षा करते हैं श्रीराम

 बस्ती  । रावण एक प्रवृत्ति है। उसके अंत के लिये श्रीराम की शरण लेना पड़ता है।  जनम-जनम मुनि जतन कराही। अन्त राम कहि आवत नाहीं।। साधारण मनुष्य और परमात्मा में यही अन्तर है कि परमात्मा जिसे मारते हैं उसे तारते भी हैं। श्रीराम अति सहज है। निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा।। वे शरणागत की रक्षा करते हैं। रावण के अत्याचारों से त्रस्त होकर विभीषण जब श्रीराम के शरण में आये तो उन्होने विभीषण को गले लगा लिया । यह सद् विचार कथा व्यास पूज्य छोटे बापू जी महाराज ने नारायण सेवा संस्थान ट्रस्ट द्वारा आयोजित 9 दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा दुबौलिया बाजार के राम विवाह मैदान में कथा को विश्राम देते हुये  व्यक्त किया।


महात्मा जी ने विविध प्रसंगों की चर्चा करते हुये कहा कि रामकथा की महिमा अनंत है। राम कथा सुनने से मन निर्मल होता हैं , राम कथा संस्कार, मर्यादा और जीवन जीने की कला सिखाती है, राम कथा पापो , कष्टों , दुखो , संताप और शोक का नाश करने वाली हैं , रामकथा सुनने से प्रभु श्री राम की कृपा मिलती हैं । राम कथा जीवन के दोषों का नाश करती हैं , राम कथा संस्कारित जीवन जीने में सहयोग प्रदान करती हैं , राम कथा सुनने से परिवार में आपसी प्रेम सामंजस्य को बढ़ावा मिलता हैं , जहा राम कथा का पाठ होता हैं वहाँ सभी देवता सपरिवार विराजमान होते हैं , प्रभु श्री राम की कथा आनन्ददायी , फलदायी ,जीवनदायी हैं ।
महात्मा जी ने कहा कि दूसरों की संपत्ति चाहे कितनी भी मूल्यवान हो उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है 14 वर्ष वनवास करने के पश्चात भगवान श्री राम जब अयोध्या पहुंचे तो अयोध्या वासी खुशियों से झूम उठे। कहा कि रामायण हमें जीवन जीने के तरीके बताती हैं। रामायण हमें आदर, सेवा, भोग, त्याग व बलिदान के साथ दूसरों की संपत्ति पर हमारा कोई अधिकार नहीं है यह भी ज्ञान देती हैं।  
श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा व्यास का विधि विधान से  मुख्य यजमान संजीव सिंह  ने पूजन किया।  बाबूराम सिंह एडवोकेट रामचन्द्र सिंह श्रीमती उषा सिंह हरेंद्र प्रताप सिंह शेरबहादुर सिंह जीतेन्द्र सिंह राजेश सिंह कुँवर बहादुर सिंह अनिल सिंह  अमरजीत सिंह राम कुमार अग्रहरी निधी सिंह हर्षित सिंह हर्षबर्धन सुनील सिंह अनूप सिंह देवेंद्र कुमार दुबेदी नरसिंह सिंह रामू राधेश्याम  चतुरसेन रनबहादुर यादव महिमा सिंह सोनू सिंह रिंकू सिंह निर्मला सिंह विभा सिंह दीक्षा सिंह इन्द्रपरि सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।

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