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Thursday, December 22, 2022

दिल्ली- वडोदरा- मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कई जगह उतारे जा सकते हैं फाइटर प्लेन

गुरुग्राम। दिल्ली-वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कई जगह फाइटर प्लेन उतारे जा सकते हैं। प्लेन उतारने के लिए सड़क की चौड़ाई लगभग 20 मीटर और सीधी लंबाई तीन किलोमीटर होनी चाहिए। एक्सप्रेस-वे का दोनों भाग लगभग 20-20 मीटर चौड़ा है।

आठ से 10 किलोमीटर की सीधी लंबाई के कई पैकेज हैं। गांव अलीपुर से दौसा के बीच ही 10 से अधिक तीन किलोमीटर से अधिक लंबाई के पैकेज हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुंबई तक कितने पैकेज होंगे।


- दिल्ली से मुंबई की कनेक्टिविटी होगी बेहतर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से आर्थिक राजधानी मुंबई की कनेक्टिविटी बेहतर करने के उद्देश्य से दिल्ली-वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है। 1380 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर लगभग 95 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसे आठ लेन का बनाया जा रहा है।

एक तरफ की चौड़ाई लगभग 20 मीटर होगी। आवश्यकता पड़ने पर इसकी चौड़ाई आसानी से बढ़ाई जा सकेगी क्योंकि 21 मीटर चौड़ाई की मीडियन बनाई जा रही है। इस तरह एक्सप्रेस-वे को 12 लेन तक किया जा सकता है। इसकी चौड़ाई इतनी अधिक है कि एयर एंबुलेंस कहीं भी उतारा जा सकता है।

फाइटर प्लेन भी कहीं उतारे जा सकेंगे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक (सोहना) मुदित गर्ग का कहना है कि फाइटर प्लेन उतारने के लिए जितनी चौड़ाई और लंबाई चाहिए उतनी दिल्ली-वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कई जगह है।

- रोड रनवे के लिए क्या जरूरी

कम से कम तीन किलोमीटर सड़क बिल्कुल सीधी और समतल हो। कहीं भी जमीन न धंसे। न कहीं भी ढलान हो। इतनी जगह होनी चाहिए कि आवश्यकता पड़ने पर प्लेन को गाडड करने के लिए पोर्टेबल लाइटिंग सिस्टम लगाए जा सकें।

- कई देशों के पास है रोड रनवे की सुविधा

भारत में रोड रनवे के ऊपर कुछ साल पहले से ध्यान देना शुरू हुआ है। दुनिया के कई देश इसके ऊपर काम कर चुके हैं। इनमें अमेरिका, जर्मनी, चीन, पाकिस्तान, ताईवान, स्वीडन, पोलैंड, साउथ कोरिया, सिंगापुर आदि शामिल हैं। पाकिस्तान में इस्लामाबाद से लाहौर मोटरवे के एक हिस्से को रोड रनवे के रूप में विकसित किया गया है। भारत में कुछ साल पहले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे ऊपर मिराज जैसी फाइटर एयरक्राफ्ट को उतारा गया था।

- महसूस हुई थी रोड रनवे की आवश्यकता

1971 की लड़ाई के दौरान पाकिस्तान के फाइटर प्लेन आगरा के नजदीक तक पहुंच गए थे। उन्हें भारतीय वायु सेना ने खदेड़ दिया था लेकिन उस समय यह महसूस किया गया था कि आगरा या ग्वालियर एयरबेस के पास ही फाइटर प्लेन उतारने का विकल्प होना चाहिए। जानकारों का मानना है कि हाईवे बेहतर विकल्प बन सकते हैं।

- क्या कहते हैं विशेषज्ञ

एयर वाइस मार्शल (रिटा.) और रक्षा विशेषज्ञ एके सिंह कहते हैं कि जब लड़ाई होती है तो एयरबेस दुश्मन के टारगेट पर होते हैं। ऐसे में हाईवे का इस्तेमाल स्ट्राइक आप्शन के रूप में किया जा सकता है। इस मामले में भारत से आगे पाकिस्तान है। उसने कई साल पहले ही इसके ऊपर काम शुरू कर दिया था। अपने देश में कुछ साल पहले से काम शुरू किया गया है। दिल्ली-वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेस-वे ही नहीं बल्कि सभी हाईवे को इस हिसाब से विकसित करने पर जोर देना चाहिए जिससे कि आवश्यकता पड़ने पर फाइटर प्लेन उतारे जा सकें। 

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