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Thursday, August 20, 2026

सीएमएलआर वर्कशॉप झांसी की नई पहल : एनएसजी-6 स्टेशनों पर मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट लगाए

वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता

झांसी। यात्रियों को स्वच्छ, सुविधाजनक और बेहतर स्टेशन सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कोच मिडलाइफ रिहैबिलिटेशन (CMLR) वर्कशॉप, झांसी ने एक अभिनव इन-हाउस पहल की है। वर्कशॉप के तकनीकी स्टाफ ने ललितपुर जिले के माताटीला, जीरोन और जखोरा तथा दतिया जिले के बसई स्टेशन पर मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट तैयार कर स्थापित किए हैं। ये सभी NSG-6 श्रेणी के स्टेशन हैं।

इस पहल की खासियत यह है कि मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट के निर्माण में कोचों की पीरियडिक ओवरहॉलिंग (POH) के दौरान निकाले गए उपयोगी और पुनः इस्तेमाल योग्य पार्ट्स का प्रयोग किया गया है। इनमें एफआरपी टॉयलेट मॉड्यूल, बायो-टैंक, पानी की टंकियां तथा कोच के अन्य उपयोगी सामान शामिल हैं।

इन पार्ट्स को कबाड़ मानकर हटाने के बजाय दोबारा उपयोग में लाने से पहले उनकी तकनीकी जांच की गई। इसके बाद सफाई, मरम्मत और आवश्यक सुधार कर उन्हें नए उपयोग के लिए तैयार किया गया। इस तरह पहल ने रेलवे के उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को भी बढ़ावा दिया है।

मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट तैयार करने से लेकर उनकी स्थापना तक का पूरा कार्य सीएमएलआर वर्कशॉप के तकनीकी स्टाफ ने स्वयं किया। इसमें एफआरपी टॉयलेट मॉड्यूल, बायो-टैंक और पानी की टंकियों की जांच, आवश्यक मरम्मत एवं सुधार, सपोर्ट स्ट्रक्चर तैयार करना, मॉड्यूलर यूनिट को असेंबल करना तथा पानी, सैनिटरी, प्लंबिंग और ड्रेनेज कनेक्शन उपलब्ध कराना शामिल रहा।

इस पहल से नए सामान की खरीद पर निर्भरता कम हुई है और उपलब्ध संसाधनों तथा वर्कशॉप की तकनीकी क्षमताओं का प्रभावी इस्तेमाल संभव हुआ है। पुनः उपयोग योग्य कोच पार्ट्स, कुशल स्टाफ और वर्कशॉप की निर्माण सुविधाओं के उपयोग से कम लागत में यात्रियों के लिए उपयोगी सुविधाएं विकसित की गई हैं।

माताटीला, बसई, जखोरा और जीरोन जैसे NSG-6 श्रेणी के स्टेशन ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्रों के यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे स्टेशनों पर स्वच्छ एवं सुविधाजनक शौचालय की उपलब्धता यात्रियों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए बेहद उपयोगी है।

मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट यात्रियों को स्टेशन परिसर में ही स्वच्छ और आसानी से उपयोग की जा सकने वाली सुविधा उपलब्ध कराते हैं। यह पहल ‘रीयूज-रिफर्बिश-रीबिल्ड’ यानी पुनः उपयोग, नवीनीकरण और पुनर्निर्माण की अवधारणा का प्रभावी उदाहरण है।

सीएमएलआर वर्कशॉप, झांसी की यह पहल पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों की बचत और कम लागत में यात्री सुविधाओं के विकास के साथ-साथ रेलवे की तकनीकी विशेषज्ञता, नवाचार और व्यावहारिक समाधान विकसित करने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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