वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
गोरखपुर। टीईटी की अनिवार्यता से उत्पन्न शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा संबंधी समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, गोरखपुर का सांसद संपर्क एवं समर्थन अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। इसी क्रम में बाँसगाँव के सांसद एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इस मामले में शीघ्र एवं सकारात्मक हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश के अनेक शिक्षक वर्षों से पूरी निष्ठा, समर्पण और दक्षता के साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे हैं। वर्तमान में टीईटी से जुड़ी परिस्थितियों के कारण उनके भविष्य और सेवा-सुरक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला संयोजक जय प्रकाश मद्धेशिया ने सांसद के इस प्रयास का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक माध्यमों से शिक्षकों की न्यायोचित समस्याओं के समाधान के लिए लगातार जनप्रतिनिधियों से संवाद कर रहा है। जिला सहसंयोजक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यह मुद्दा केवल शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा का नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य से भी जुड़ा है। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और योगदान की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न्यायालय के निर्णयों पर टिप्पणी करना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर शिक्षकों के हितों की प्रभावी पैरवी करना है। संगठन ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेंगी।
महासंघ ने सांसद कमलेश पासवान के इस कदम के लिए उनका आभार व्यक्त किया। इस दौरान कार्यकारी मंडल अध्यक्ष आञ्जनेय त्रिपाठी, जिला संयोजक जय प्रकाश मद्धेशिया, जिला सहसंयोजक धर्मेंद्र कुमार सिंह, महेंद्र कुमार पटेल, विजय कुमार बरनवाल सहित अन्य शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। संगठन ने सभी शिक्षक साथियों से संयम बनाए रखते हुए अभियान से जुड़ने की अपील की।

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