बनकटी (बघाडी़ गांव)। विकास क्षेत्र बनकटी के बघाडी़ गांव स्थित महादेवा बस्ती में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पं० कैलाश जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का मनमोहक वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
कथा के प्रारंभ में आचार्य श्री ने कहा कि जिस परम सत्ता को बड़े-बड़े ऋषि-मुनि तप और यज्ञ से भी प्राप्त नहीं कर पाते, वही प्रभु अपने भक्तों के लिए अत्यंत सरल और सुलभ हैं। उन्होंने कहा, “प्रभु की लीलाएं दर्शाती हैं कि वे पद, प्रतिष्ठा या ज्ञान के नहीं, बल्कि निश्छल प्रेम के भूखे हैं।”
- माखन चोरी : प्रेम और अहंकार विमोचन की लीला
महाराज श्री ने माखन चोरी प्रसंग को केवल बाल शरारत न बताते हुए उसे भक्तों के अहंकार हरण और हृदय शुद्धि की लीला बताया। उन्होंने कहा कि गोप-ग्वालों के घरों से माखन चुराकर भगवान उन्हें अपने स्नेह का प्रसाद देते थे। यह लीला भक्तों को प्रभु की निकटता और स्पर्श का सौभाग्य प्रदान करती थी।
- पूतना को मिली ‘माँ’ की गति
कथा में पूतना उद्धार प्रसंग का उल्लेख करते हुए आचार्य उत्कर्ष पाण्डेय जी ने कहा कि राक्षसी पूतना भी प्रभु की करुणा से वंचित नहीं रही। भगवान श्री कृष्ण ने उसके दुष्ट भावों का अंत कर उसमें छिपे ‘मातृत्व भाव’ को स्वीकार किया और उसे मातृगति प्रदान की। यह प्रसंग प्रभु की असीम दया और करुणा का प्रतीक है।
- गोवर्धन पूजा : प्रकृति संरक्षण का संदेश
कथा का प्रमुख आकर्षण गोवर्धन पूजा प्रसंग रहा। आचार्य श्री ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण द्वारा इंद्र पूजा रुकवाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा कराना प्रकृति के सम्मान और संरक्षण का संदेश है।
उन्होंने कहा, “गोवर्धन पूजा हमें सिखाती है कि पर्वत, पेड़-पौधे, जल और वायु जैसी प्राकृतिक शक्तियां ही हमारी पहली देवी हैं। पर्यावरण की रक्षा करना ही सच्चा धर्म है।”
कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान के बाल स्वरूप की मधुरता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और धर्म के प्रति नई प्रेरणा मिली।
इस अवसर पर मुख्य यजमान योगेश जी महाराज, बलराम प्रसाद शुक्ल, राम सूरत शुक्ल, धनश्याम शुक्ल, लकी विक्की, ओंकार, चंदन, बृजेश, नीरज, धीरज, आदित्य, रामू शर्मा, अयोध्या यादव सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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