लाल-गुलाबी रंगत इसकी, जैसे कोई दुल्हन शर्माए,
मई-जून की तपती धूप में, यह हर मन को हर्षाए।
शाही और चाइना जैसी, नस्लें इसकी बड़ी निराली,
स्वाद अनोखा, रस से भरपूर, हर डाल पर दिखती लाली।
मुजफ्फरपुर की धरती का, यह तो सबसे अनमोल रतन है,
हर साल इस मिठास को चखने, तरसता हर एक जन है।
गर्म हवा के झोंकों में भी, यह अमृत का अहसास दिलाती,
मुजफ्फरपुर का नाम पूरे, दुनिया के नक्शे पर चमकाती।
छिलका इसका खुरदरा सा, पर अंदर मिश्री सी मिठास है,
यह सिर्फ एक फल नहीं, हमारे बिहार का गौरव और विश्वास है।
स्मृति सिंह राजपूत
भगवानपुर, मुजफ्फरपुर
बिहार

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